कॉमनवेल्थ गेम्स में कांस्य पदक विजेता यशवीर का भिवानी में भव्य स्वागत
कॉमनवेल्थ गेम्स में कांस्य पदक जीतकर भारत का नाम रोशन करने वाले भिवानी के होनहार जैवलिन थ्रो खिलाड़ी यशवीर का अपने गृह जिले पहुंचने पर भव्य स्वागत किया गया। एयरपोर्ट से लेकर भिवानी तक, हर जगह फूल-मालाओं के साथ उनका अभिनंदन हुआ। जिले में जश्न का माहौल था, और इस मौके पर यशवीर और उनके पिता ने मीडिया से बातचीत में अपनी सफलता, संघर्ष और भविष्य के लक्ष्य साझा किए।
चैंपियन की तरह हुआ स्वागत
भिवानी में पहली बार पहुंचे यशवीर का स्वागत किसी चैंपियन की तरह हुआ। समर्थकों ने फूल-मालाओं से उनका अभिनंदन किया और ढोल-नगाड़ों की धुन पर खुशी जताई। इस ऐतिहासिक उपलब्धि से यशवीर का परिवार ही नहीं, बल्कि पूरा भिवानी जिला गर्वित नजर आया।
सफलता की कहानी
यशवीर ने बताया कि यह उनके जीवन का पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट था, और पहले ही प्रयास में पदक जीतना उनके लिए बेहद खास है। उन्होंने कहा कि एयरपोर्ट से ही उन्हें जो प्यार और सम्मान मिल रहा है, वह उन्हें आगे और बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा दे रहा है।
खेल विरासत और प्रेरणा
यशवीर ने बताया कि खेल उनके परिवार की विरासत है। उनके दादा और पिता दोनों खेलों से जुड़े रहे हैं। उनके पिता की प्रेरणा ने उन्हें जैवलिन थ्रो की ओर बढ़ाया। उन्होंने ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा को अपनी प्रेरणा बताया और कहा कि उनके मुकाबले और वीडियो देखकर उन्हें लगातार सीखने का मौका मिला।
भविष्य की योजनाएं
यशवीर ने कहा कि अब उनका पूरा फोकस एशियन गेम्स और ओलंपिक पर है। उनका मानना है कि भारतीय जैवलिन थ्रो का स्तर और ऊंचा होगा क्योंकि जूनियर खिलाड़ी भी शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं।
खान-पान और आहार
डाइट को लेकर यशवीर ने बताया कि प्रतियोगिता के दौरान वह बाहर का खाना छोड़ देते हैं और केवल घर का बना भोजन ही खाते हैं। मजाकिया अंदाज में उन्होंने अपनी पसंदीदा चीजों में घी-चूरमा और आइसक्रीम का जिक्र किया।
युवाओं के लिए संदेश
भिवानी के युवाओं को संदेश देते हुए यशवीर ने कहा कि अगर खुद पर विश्वास और मेहनत करने का जज्बा हो तो कोई भी खिलाड़ी बड़ी सफलता हासिल कर सकता है।
पिता की प्रतिक्रिया
यशवीर के पिता ने भी बेटे की इस उपलब्धि पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि अब परिवार का अगला लक्ष्य ओलंपिक की तैयारी है। उन्होंने बताया कि उनका पूरा परिवार कई पीढ़ियों से खेलों से जुड़ा रहा है, और यही खेल संस्कृति यशवीर की सफलता की सबसे बड़ी ताकत बनी है।
भविष्य के लिए दृष्टिकोण
यशवीर के पिता ने भिवानी के खिलाड़ियों को संदेश देते हुए कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। ईमानदारी, अनुशासन, कोच का सम्मान और जो भी सुविधाएं उपलब्ध हों, उन्हीं में मेहनत करते रहना ही खिलाड़ी को मंजिल तक पहुंचाता है।
कॉमनवेल्थ गेम्स का यह कांस्य पदक सिर्फ यशवीर की जीत नहीं, बल्कि भिवानी की खेल परंपरा, परिवार की वर्षों की मेहनत और नई पीढ़ी के सपनों की भी जीत है। अब पूरे जिले की निगाहें यशवीर के अगले बड़े लक्ष्य—एशियन गेम्स और ओलंपिक—पर टिकी हैं।
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