उत्तर-पूर्व के पहले ग्रैंडमास्टर बने मयंक चक्रवर्ती: यूट्यूब से सीखी चालों से मिली बड़ी सफलता
गुवाहाटी: शतरंज की दुनिया में एक नया इतिहास रचते हुए, 16 वर्षीय मयंक चक्रवर्ती ने उत्तर-पूर्व भारत के पहले ग्रैंडमास्टर बनने का गौरव हासिल किया है। मयंक अब भारत के 94वें ग्रैंडमास्टर भी बन चुके हैं।
मयंक की इस अद्वितीय सफलता की कहानी उतनी ही दिलचस्प है जितनी उनकी यात्रा। उन्होंने शतरंज की बारीकियों को यूट्यूब से सीखा, जो आज के डिजिटल युग में सीखने के नए तरीकों का प्रतीक है।
- उम्र: 16 वर्ष
- प्रेरणा: यूट्यूब से सीखी शतरंज की चालें
- उपलब्धि: उत्तर-पूर्व के पहले ग्रैंडमास्टर और भारत के 94वें ग्रैंडमास्टर
मयंक की यह उपलब्धि न केवल उनके व्यक्तिगत प्रयासों का परिणाम है, बल्कि यह उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा भी है जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए तकनीकी साधनों का उपयोग कर रहे हैं।
मयंक का कहना है, “यूट्यूब ने मेरे लिए शतरंज को समझने और सीखने का एक नया रास्ता खोला। मैंने कई ग्रैंडमास्टर्स के गेम्स और स्ट्रेटेजीज को देखा और उनसे प्रेरणा ली।”
उनकी इस अद्वितीय यात्रा ने यह साबित कर दिया है कि यदि इच्छाशक्ति हो तो किसी भी संसाधन का सही उपयोग कर सफलता पाई जा सकती है।
मयंक की इस सफलता पर उनके परिवार और दोस्तों ने उन्हें बधाई दी है और इस उपलब्धि को पूरे उत्तर-पूर्व क्षेत्र के लिए एक बड़ी प्रेरणा के रूप में देखा जा रहा है।
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