शहीद दिवस से पूर्व राज्य आंदोलनकारियों का अल्टीमेटम: पेंशन और आरक्षण की मांग

उत्तराखंड में शहीद दिवस से पहले राज्य आंदोलनकारियों ने सरकार को चेतावनी दी है। खटीमा, ऊधम सिंह नगर में कुमाऊं मंडल के वंचित राज्य आंदोलनकारियों ने उपजिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा है। आंदोलनकारियों ने राज्य के गठन के 25 वर्ष पूरे होने के बावजूद अपनी उपेक्षा पर नाराजगी जताई है।

  • आंदोलनकारियों का दावा है कि 12 हजार परिवार अभी भी सम्मान की लड़ाई लड़ रहे हैं।
  • सरकार पर आंदोलनकारियों का वर्गीकरण करके उन्हें न्यूनतम 5500 रुपये पेंशन देने का आरोप है।
  • उन्होंने 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण को सही तरीके से लागू करने की मांग की है।
  • पूर्व सैनिक आंदोलनकारियों की पेंशन को पुनः शुरू करने की मांग की गई है।
  • सभी 12 हजार चिन्हित आंदोलनकारियों को राज्य निर्माण सेनानी का दर्जा देकर 20 हजार रुपये मासिक पेंशन देने की अपील की गई है।
  • आंदोलनकारियों का आरोप है कि खटीमा में 253 आंदोलनकारियों का चिन्हीकरण रद्द कर दिया गया है।
  • 10% आरक्षण के बावजूद केवल 7 लोगों को नौकरी मिली है।
  • देहरादून शहीद स्थल पर पिछले 65 दिनों से विरोध प्रदर्शन जारी है।
  • आंदोलनकारियों ने 1 सितंबर को उग्र विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं।

महत्वपूर्ण चेतावनी: यदि सरकार ने आंदोलनकारियों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो चम्पावत, ऊधम सिंह नगर, नैनीताल सहित पूरे कुमाऊं के आंदोलनकारी 1 सितंबर को शहीद दिवस पर उग्र विरोध प्रदर्शन करेंगे।

राज्य आंदोलनकारियों का यह आंदोलन सरकार के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि अगर उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो वे बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। यह मामला राज्य के सामाजिक और राजनीतिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।