पौराणिक कथाओं से जुड़े टेसू और झोंझी उत्सव का आयोजन किया गया, यूपी के बुंदेलखंड और पश्चिमी क्षेत्र में टेसू और झोंझी का ऐतिहासिक महत्व माना जाता है इसकी शुरूआत शारदीय नवरात्रि की नवमी को इस उत्सव का शुभारंभ होता है, इस दिन बालक रीच बनकर और बालिकाएं पटोली जिस पर धी या तेल का दिया लेकर घर घर जाकर गायन वादन कर पारंपरिक गीतों से टेसू झोंझी महत्व दर्शाया जाता है, वहीं दशहरा के दिन मिट्टी का टेसू और झोंझी से घर घर जाकर मंगल गायन करते हुए इस पारम्परिक उत्सव को बनाया जाता है वहीं देर रात माताएं बहनें झोंझी को सिर पर रखकर नृत्य गायन से आपसी प्रेम, एकता और धर्म के प्रति निष्ठा जताती हैं। इस उत्सव का समापन पूनम की रात को टेसू और झोंझी विवाह कार्यक्रम के बाद किसी तालाब और नदी नाले में विसर्जन कर होता है, जिसे बड़े धूम धाम से आयोजित किया जाता है
कानपुर में टेसू-झोंझी का भव्य विवाह और विसर्जन
The Grand Wedding and Immersion of Tesu-Jhonjhi in Kanpur
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