भट्टू में बिजली कर्मचारियों ने कामकाज छोड़ एसडीओ कार्यालय पर किया प्रदर्शन, किसान, सरपंच, पटवारी और आम जनता ने भी दिया समर्थन।
हरियाणा के गुरुग्राम और नूंह जिलों में बिजली वितरण का लाइसेंस 25 वर्षों के लिए निजी कंपनी को सौंपने के विरोध में भट्टू में बिजली कर्मचारी कामकाज छोड़ तीन दिवसीय पूर्ण हड़ताल पर चले गए हैं। गुरुवार को भट्टू में बिजली कर्मचारियों ने एसडीओ कार्यालय के समक्ष जोरदार धरना-प्रदर्शन कर सरकार की निजीकरण नीति के खिलाफ बिगुल फूंका। इस प्रदर्शन की अगुवाई महेन्द्र सिंह घोड़ेला और प्रदीप कुमार बिसला ने की, जबकि मंच का संचालन ओम प्रकाश सिंवर द्वारा किया गया।
धरना-प्रदर्शन को संबोधित करते हुए मोर्चा नेताओं ने स्पष्ट किया कि बिजली विभाग का निजीकरण किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने सरकार पर सार्वजनिक बिजली व्यवस्था को कॉरपोरेट कंपनियों के हवाले करने का आरोप
लगाते हुए कहा कि जिस प्रकार बीएसएनएल को कमजोर कर निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाया गया, उसी तर्ज पर बिजली विभाग को भी बर्बाद करने की साजिश रची जा रही है। कर्मचारियों ने आशंका जताई कि निजीकरण से कर्मचारियों की सेवा सुरक्षा पर खतरा मंडराएगा और आम उपभोक्ताओं पर महंगी बिजली का भारी बोझ पड़ेगा। उन्होंने मांग की कि वितरण व्यवस्था को सार्वजनिक क्षेत्र में ही रखा जाए, ताकि आमजन को सस्ती और निर्बाध बिजली मिलती रहे। प्रदर्शन में मुख्य रूप से एसडीओ भट्टू विपिन वर्मा, भजनलाल एफएम, विजेंद्र एसए, पवन जेई, पवन माचरा एसए, रमेश बिसला, रमेश बिश्नोई, कुलदीप एसए और नरेंद्र यादव सहित भारी संख्या में कर्मचारी एवं समर्थक उपस्थित रहे। कर्मचारियों ने दोहराया कि जब तक सरकार निजीकरण के फैसले को वापस नहीं लेती, सार्वजनिक बिजली व्यवस्था की रक्षा के लिए उनका संघर्ष जारी रहेगा। व्यापक जनसमर्थन से मजबूत हुआ आंदोलन भट्टू एसडीओ कार्यालय के बाहर आयोजित इस प्रदर्शन को समाज के विभिन्न वर्गों का भरपूर सहयोग मिला। धरनास्थल पर पहुंचकर संयुक्त किसान मोर्चा, सरपंच एसोसिएशन, पटवारी एवं कानूनगो एसोसिएशन तथा स्थानीय नागरिकों ने कर्मचारियों की मांगों का खुलकर समर्थन किया। विभिन्न सामाजिक व प्रशासनिक यूनियनों की भागीदारी से कर्मचारियों के इस आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन मिला है। मुख्य वक्ताओं में किसान सभा के जिला प्रधान विष्णु दत्त, सुभाष चन्द्र भादु, मनीष सिवाच, बृजलाल कड़वासरा आदि ने इस फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग की।