संयुक्त किसान मोर्चा और रिटायर्ड कर्मचारी संघ ने राष्ट्रव्यापी आह्वान के तहत आज स्थानीय बीटीएम चौक पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर के पुतले जलाकर केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त को तुरंत बर्खास्त करने, मतदाता सूची से हटाए गए साढ़े तेरह करोड़ मतदाताओं के नाम दोबारा जोड़ने और एसआईआर प्रक्रिया को रद्द करने की मांग उठाई। इसके साथ ही हरियाणा में बिजली कर्मचारियों के आंदोलन का समर्थन करते हुए बिजली वितरण के निजीकरण और निजी कंपनियों को समानांतर लाइसेंस देने की प्रक्रिया वापस लेने की मांग की गई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता अखिल भारतीय किसान सभा के ब्लॉक प्रधान संतोष देशवाल और रिटायर्ड कर्मचारी संघ के जिला प्रधान नरेश कुमार शर्मा ने संयुक्त रूप से की । जबकि मंच संचालन किसान सभा के जिला प्रधान रामफल देशवाल ने किया।
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए किसान सभा के जिला प्रधान रामफल  देशवाल, जिला उपप्रधान कामरेड ओम प्रकाश, पिछड़ा वर्ग के नेता राजेंद्र तंवर, रिटायर्ड कर्मचारी संघ के नेता कृष्णा सिवाच  महेंद्र तंवर व सीटू नेता सुखदेव पालवास  ने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा एसआईआर के नाम पर मतदाता सूचियों से बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने से लोकतांत्रिक अधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उन्होंने मांग की कि मतदाता सूची से हटाए गए सभी पात्र मतदाताओं के नाम बहाल किए जाएं और एसआईआर की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए। लोकतंत्र में प्रत्येक पात्र नागरिक को मतदान का अधिकार मिलना चाहिए और किसी भी बहाने से लोगों को उनके संवैधानिक अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
वक्ताओं ने हरियाणा में बिजली वितरण के निजीकरण की प्रक्रिया पर कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर की भूमिका के चलते प्रदेश के बिजली क्षेत्र में निजी कंपनियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इलेवन पावर कंपनी को समानांतर लाइसेंस देने का फैसला आम जनता, किसानों, मजदूरों और व्यापारियों के हितों के खिलाफ है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस फैसले के दूरगामी और गंभीर परिणाम होंगे। निजी कंपनियां मुनाफे को प्राथमिकता देंगी, जिससे आम उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ने और बिजली महंगी होने का खतरा है।
वक्ताओं ने कहा कि गुरुग्राम क्षेत्र से हरियाणा के बिजली वितरण निगम को मिलने वाली आय का बड़ा हिस्सा जुड़ा हुआ है। यदि इस क्षेत्र के बिजली वितरण में निजी कंपनियों को समानांतर लाइसेंस देकर मुनाफे देने  वाले उपभोक्ताओं को अलग किया गया, तो दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम की आर्थिक स्थिति और कमजोर हो सकती है। निगम की वित्तीय हालत बिगड़ने पर उसकी भरपाई आम उपभोक्ताओं से अधिक दरें वसूलकर किए जाने की आशंका है। उन्होंने कहा कि आज एक क्षेत्र में निजी कंपनियों को रास्ता दिया जा रहा है, कल प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी बिजली वितरण निजी हाथों में सौंपने की कोशिश की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि बिजली केवल एक व्यावसायिक वस्तु नहीं, बल्कि आम जनता की बुनियादी जरूरत है। बिजली क्षेत्र के निजीकरण से किसानों की खेती, मजदूरों की आजीविका, छोटे व्यापारियों के कारोबार और युवाओं के रोजगार पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। सरकारी बिजली निगमों को कमजोर करने के बजाय उन्हें मजबूत किया जाना चाहिए, ताकि जनता को सस्ती और निर्बाध बिजली मिल सके। वक्ताओं ने सरकार से निजीकरण की प्रक्रिया वापस लेने और बिजली कर्मचारियों की मांगों का समाधान बातचीत के माध्यम से करने की मांग की।
सीटू नेता सुखदेव पाल वास ने बिजली कर्मचारियों के आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि मजदूर वर्ग इस संघर्ष में कर्मचारियों के साथ खड़ा है। उन्होंने कहा कि बिजली क्षेत्र को निजी कंपनियों के हवाले करने का फैसला जनहित में नहीं है। उन्होंने आम जनता, किसानों, मजदूरों और कर्मचारियों से अपील की कि वे बिजली कर्मचारियों के आंदोलन को व्यापक समर्थन दें, ताकि सरकार पर दबाव बनाकर इस जनविरोधी फैसले को वापस करवाया जा जा सके।
प्रदर्शनकारियों ने एकजुट होकर मांग की कि केंद्र सरकार चुनाव आयोग की निष्पक्षता और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करे तथा हरियाणा सरकार बिजली क्षेत्र के निजीकरण की प्रक्रिया पर रोक लगाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसानों, मजदूरों, कर्मचारियों और आम जनता के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखा जाएगा। उसके बाद किसान व रिटायर्ड कर्मचारी प्रदर्शन करते हुए बिजली हड़ताली कर्मचारियों में शामिल हुए और समर्थन दिया ।